कबीरपरमेश्वर का मगहर से सशरीर सतलोक गमन और मगहर लीलाएं
कबीरपरमेश्वर का मगहर से सशरीर सतलोक गमन और मगहर लीलाएं:- कबीर परमात्मा का जन्म नहीं होता है और मरते भी नहीं है कबीर परमात्मा सशरीर ही सतलोक से आते हैं और सशरीर सतलोक जाते हैं :- 1-काशी के ब्राह्मणों ने गलत अफवाह फैला रखी थी कि जो काशी में मरता है स्वर्ग जाता है और जो मगहर में शरीर छोड़ता है वह गधे का जन्म पाता है। कबीर परमेश्वर जी मनमाने लोकवेद का खंडन करने के लिए मगहर में हजारों लोगों के सामने सशरीर गये। शरीर की जगह फूल मिले और भविष्यवाणी कर बताया कि मैं स्वर्ग और महास्वर्ग से ऊपर अविनाशी धाम सतलोक जा रहा हूँ। तहां वहां चादरि फूल बिछाये, सिज्या छांडी पदहि समाये। दो चादर दहूं दीन उठावैं, ताके मध्य कबीर न पावैं।। कबीर, क्या काशी क्या ऊसर मगहर, राम हृदय बस मोरा। जो कासी तन तजै कबीरा, रामे कौन निहोरा।। मगहर में मरने वाला गधा बनता है इस भ्रम का खंडन करते हुए कबीर परमात्मा ने बताया कि जिसके हृदय में परमात्मा का वास हैं वह चाहे काशी में मरे या मगहर में उसकी मुक्ति निश्चित है। यदि काशी में तन छोड़ने से मुक्ति होती है तो भगवान को भजने की क्या आवश्यकता थी? 2-मगहर में सूखी नदी में पान...